उपार्जन पंजीयन व्यवस्था में शिकायतों के बाद आधार वेरिफिकेशन के बाद ही बेच सकेंगे फसल
भोपाल
प्रदेश में रबी फसल के उपार्जन के लिए किए जाने वाले पंजीयन के बाद किसान अपनी फसल तभी समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे जब खसरों में आधार नम्बर दर्ज कराने के बाद राजस्व विभाग के डेटा से सत्यापन हो जाएगा। प्रारंभिक जांच के दौरान डेटा सत्यापन न होने पर जिलों से इसका सत्यापन कराया जाएगा। उधर राज्य सरकार ने यह भी साफ किया है कि किसानों को पंजीयन के पहले आधार सत्यापन की बाध्यता नहीं रहेगी। उनका पंजीयन होता रहेगा। अगर कोई इसके लिए बाध्य करे तो कलेक्टर ऐसे मामलों में कार्यवाही करेंगे। जिलों में कलेक्टर किसानों के पंजीयन में आधार सत्यापन न होने के बाद भी पंजीयन कराएंगे।
इसको लेकर प्रमुख सचिव खाद्य फैज अहमद किदवई ने कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि सभी किसानों को पंजीयन के समय आधार नम्बर देना होगा जिसको बाद में वेब सर्विस के माध्यम से राजस्व विभाग के डाटाबेस से मिलान किया जा सकेगा। अगर इनमें अंतर पाया जाएगा तो इसका सत्यापन जिलों से कराया जाएगा और वेरीफाई होने के बाद ही किसान फसल बेच सकेंगे। जिन खसरों में आधार नम्बर दर्ज नहीं है, उसमें आधार नम्बर दर्ज करने के लिए राजस्व विभाग द्वारा पटवारियों को निर्देश देंगे कि सारा पोर्टल के माध्यम से किसानों का आधार नम्बर दर्ज करें।
कलेक्टरों को दिए निर्देश में यह भी कहा गया है कि सिकमी कृषकों के पंजीयन में दोनों किसानों (भूमि बटाई पर देने वाले तथा सिकमी किसान) के पंजीयन की व्यवस्था लागू की गई है। गौरतलब है कि रबी उपार्जन वर्ष 2021-22 के तहत मध्यप्रदेश सरकार द्वारा समर्थन मूल्य 1975 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीदी की जायेगी। किसानों से कहा गया है कि प्रदेश के किसान समर्थन मूल्य पर फसल विक्रय हेतु 20 फरवरी 2021 तक पंजीयन अवश्य करा लें। खरीदी 15 मार्च से शुरू होगी।

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